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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 28
दिदृक्षुस्त्वामहं यस्मै यत्नानकरवं बहून्। बत मे सम्मदः सोऽभूदस्तु वा मास्तु वा तव।।
तेरे को देखने की इच्छा से मैंने तेरे लिए अनेक प्रयत्न किए तो मुझे उससे अत्यधिक आनन्द हुआ, तुझे हो या न हो।
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