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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 27
विहितो मुस्तफेनोच्चैद्वेषादफजलेन वा। तं मन्तुतन्तुं राजेन्द्र मदीयं मन्तुमर्हसि ।।
मुस्तुफखान ने या अफजलखान ने अत्यन्त द्वेष से जो कोई बड़ा या छोटा अपराध किया है तो हे राजेन्द्र! उसको मेरा ही मान सकते हैं।
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