महमूद बोला - मुझ अविवेकी से जो कुछ हुआ वह जानबूझकर नहीं हुआ है, ऐसा समझो। हे राजा! तेरे जैसे ज्ञानी की इस संसार में दुर्जेय कुछ भी नहीं है।
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