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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 26
महमूद उवाच- मत्तो हाजानतो जातं तद्धि नो विद्धि जानतः। न जगत्त्यत्र दुर्जेयं राजस्तव विजानतः ।।
महमूद बोला - मुझ अविवेकी से जो कुछ हुआ वह जानबूझकर नहीं हुआ है, ऐसा समझो। हे राजा! तेरे जैसे ज्ञानी की इस संसार में दुर्जेय कुछ भी नहीं है।
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