इमामुपकृति कृत्वा निधास्याम्यस्य मूर्धनि।
न विस्मरिष्यति होनां कुलीनोऽयं गुणाग्रणीः ॥
मैं इसके सिर पर उसको छोड़ने के, इस उपकार को करके रखूंगा तो यह कुलीन एवं गुणों में अग्रणी शहाजी इसको नहीं भूलेगा।
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