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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 22
सर्वथा जिह्मगस्यास्य रोषो मन्मन्त्रवैभवात्। अपकारपरस्यापि प्रयास्यत्यत्यवकेशिताम्।।
अपकारी इस सांप का क्रोध मेरी युक्ति के प्रभाव से पूर्णतः निष्पाप हो जायेगा।
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