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शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 20
पृदाकुरिव निर्मुक्तो मोक्तव्योऽयं मया यदि। अपकारपरस्तर्हि किं मां नापकरिष्यति ।।
अपकारक सांप की तरह यदि इस शहाजी को मैंने छोड़ दिया तो यह अपकारक, मेरा अहित किस कारण से नहीं करेगा?
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