मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 15 • श्लोक 12
आगांसि सुगरीयांसि क्षन्तुं नैव क्षमोऽभवम्। तदानीं निग्रहायास्य मुस्तुफाखानमादिशम् ।।
किन्तु अक्षम्य एवं बड़े अपराधों को जब मैं क्षमा करने में असमर्थ हुआ तो तब इसको पकड़ने के लिए मैंने मुस्तुफखान को आदेश दिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें