अनेन हेतुना ह्यस्य मन्तवः शतशो मया।
अतिक्रान्ताध्वनोऽत्यर्थं क्षान्ता एव दिने दिने ।।
इस कारण से ही अत्यन्त मार्ग का उल्लंघन करके व्यवहार करने वाले इस शहाजी के सैकड़ों अपराध मैंने माफ कर दिये थे।
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