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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 77
अभिमुखमुपायातं तत्र प्रभूतबलं बलायुधि किल फतेखानं भ‌ङ्क्त्वा स शाहनृपात्मजः। अविहतगतिर्दैवोद्रेकादुदित्वरविक्रमो विजयपुरभूशक्रं जेतु बताभिमुखोऽभवत्।।
वहां अनेक सैनिकों के साथ सामने आये हुए उस फतेखान को, उस शहाजी के पुत्र शिवाजी ने बल से भग्न करके, भाग्य के कारण अप्रतिहत गत्तिवाला एवं उदयमान पराक्रमी वह शिवाजी विजापूर के सुलतान को जीतने के लिए उत्साही हुआ।
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