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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 73
ततो निरायुधो भूत्वा कृत्वानभिमुखं मुखम्। यवनस्स परावृत्तिपथ लेभे यथासुखम् ।।
तत्पश्चात् निःशस्त्र होकर मुंह घुमाकर वह यवन स्वेच्छा से इधर-उधर पलायन करने लगा।
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