मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 70
स तेन शीघ्रहस्तेन द्विषता द्विदलीकृतम्। विचित्रवर्णदुर्वर्णविन्दुराजिविराजितम्।। तदा तदाहवसखं विहाय विशिखासनम्। सद्यस्तमहितं हन्तुं घोरं परिघमाददे ।।
निपुण हाथों से शत्रु द्वारा दो टुकड़े किए गए, रंग-बिरंगे बिंदियों की पंक्ति से सुशोभित, युद्ध के मित्र, ऐसे उस धनुष को उस समय छोड़कर, उस शत्रु को मारने के लिए उसने लोहे का सोटा उठाया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें