अथ प्रहारैर्बहुभिर्निर्भरं विद्धलोऽपि सन्।
बली स पातयामास खड्गं गोदस्य मूर्धनि।।
फिर अनेक प्रहारों से अत्यन्त घायल हुए उस बलवान् मुसेखान ने गोदाजी के मस्तक पर प्रहार किया।
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