भौहों को चढ़ाकर एवं अत्यन्त क्रोध से क्रूर दृष्टि वाले वे दोनों ही हाथों में भयंकर तलवारों को लेकर कभी आगे तो कभी पीछे हट रहे थे, हाथी के समान गर्जना करते हुए जब आपस में प्रहार कर रहे थे तो उनके मुकुट एवं कवच विदीर्ण होकर दोनों सुशोभित होने लगे।
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