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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 60
निबद्धभूपुटी भूरिशेषरूक्षेक्षणावुभौ। गतप्रत्यागतकरी घोरखड्ङ्गलताकरी ।। द्विरदा इव नर्दन्ती प्रहरन्ती परस्परम्। विशीर्यमाणशीर्षण्यतनुत्री ती विरेजतुः ।।
भौहों को चढ़ाकर एवं अत्यन्त क्रोध से क्रूर दृष्टि वाले वे दोनों ही हाथों में भयंकर तलवारों को लेकर कभी आगे तो कभी पीछे हट रहे थे, हाथी के समान गर्जना करते हुए जब आपस में प्रहार कर रहे थे तो उनके मुकुट एवं कवच विदीर्ण होकर दोनों सुशोभित होने लगे।
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