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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 57
तत्र तत्करवालेन तडिदाकारधारिणा। पेतुः पठाणाः शतशः शकलीभूय भूतले ॥
उस स्थान पर उस आकाशीय विद्युत् की तरह आकृति से युक्त तलवार से सैकड़ों पठानों के टुकड़े होकर भूमि पर गिर गये।
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