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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 52
अतिमात्रं जिघत्सन्तस्तत्क्षणाधिगतक्षणाः। अतृप्यन् प्रचुरं प्राप्य पिशितं पिशिताशनाः ॥
अतिशय भूखे राक्षस उस समय आनन्दित होकर अत्यधिक मांस के मिलने के कारण से संतुष्ट हो गये।
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