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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 49
तदा पुरन्दरतटादतिमात्रस्मयोद्धता। प्रणदन्ती प्रववृते लोहितोदा महानदी ।।
उस समय पुरंदर किले के तट से गर्जना करती हुई रक्त की महानदी अत्यन्त अभिमान के साथ उन्मुक्त एवं आवाज करती हुई प्रवाहित होने लगी।
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