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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 44
स एकोद्वाविमौ तत्र युद्धमप्यभवच्चिरम्। तथापि भैरवश्चोरः प्रतिपेदे जयश्रियम्।।
यह अकेला और दोनों होते हुए भी वहां पर बहुत समय तक युद्ध चला तथापि अन्त में भैरव चोर को ही विजयश्री प्राप्त हुई।
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