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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 42
आकर्णाकृष्टधन्वानौ मिनादरतनावपि। अभ्येतं भैरवं चोरं छादयामासतुः शरैः ॥
मिनाद एवं रतन ने भी धनुष को कान तक खींचकर समीप आये हुए भैरव चोर नामक राजा को बाण से ढक दिया।
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