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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 40
ततस्स्रवदसृग्दिग्धदेहो युद्धविशारदः । शक्त्यैव घाण्टिकोत्युचैः प्रवेष्टे तमताडयत्।।
तब शरीर से बहने वाले रक्त से रंजित हुए उस युद्ध निपुण घाटगे ने भी शक्ति से उसकी भुजा पर जोर से प्रहार किया।
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