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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 35
अलञ्चकार तं तत्र रुधिराईमुरस्स्थलम् । यथा शिलोच्चयं सान्द्रगैरिकाक्तशिलातलम् ।।
गहरी लाल मिट्टी से रंगी हुई चट्टान जैसे पर्वत को सुशोभित करती है, वैसे ही रक्तरंजित उसकी छाती उसको सुशोभित करने लगी।
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