किन्तु उस शत्रु के द्वारा अपने छाती में घुसाये हुए एवं कवच को भेदकर जाने वाले उस तीक्ष्ण एवं भयंकर भाले को, उस यवन ने दोनों हाथों से अपनी छाती से निकालकर, क्रोध से दांत एवं ओठों को चबाते हुए उसके दो टुकड़े कर दिए।
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