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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 29
अभ्याहवस्मयभूतो युगव्यायतबाहवः । वरशीर्षण्यशीर्षाणोवर्मसंवृत विग्रहाः ॥ ते तेऽनीकडूयीयोधाः सविरोधाः परस्परम्। शरासने विद्युत्वानाः सन्दधानाश्शितं शरम् ।। भूयो भूयस्सहस्वेति भाषमाणास्स्मयाभूतम् । तटे पुरन्दरगिरेस्तदा युयुधिरेऽद्भुतम् ॥
युद्ध के लिए आवेशित, जुए की तरह लम्बे हाथ वाले, सिर पर उत्कृष्ट मुकुट को धारण करने वाले एवं कवच को शरीर पर धारण किए हुए, परस्पर विरोध करने वाले, दोनों सेनाओं के योद्धा, धनुष को हिलाते हुए एवं तीक्ष्ण बाणों से युक्त, सहन कर, सहन कर, इस प्रकार बार-बार गर्व से बोलते हुए, उस पुरंदर किले की चढ़ाई पर दोनों ने अद्भुत युद्ध किया।
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