तत्पश्चात् इस प्रकार बोलते हुए ही वह महामना मुसेखान पीछे की ओर से लौटने वाले विशाल सेना एवं अपनी सेना से युक्त अशरफशहा, दोनों शेखों सहित मत्राजी राजा, उसी प्रकार फलटण का बलवान् राजा, फत्तेखान की सेना और अनेक सामंत राजाओं के साथ वेगपूर्वक पुरंदर किले की चढ़ाई चढ़ने लगा।
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