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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 24
इति ब्रुवाण एवायं समन्तैरनिवर्तिभिः । पुरन्दराचलतरामास्रोह महामनाः ॥ अथो शरफशाहेन सैनिकैः स्वैश्च भूरिशः । उभाभ्यामपि शेखाभ्यां राज्ञा मत्रजिता तथा ॥ प्रबलेन फलस्थाननायकेन च रंहसा । फतेखानस्य चानीकैः सामन्तैरप्यनेकशः ॥
तत्पश्चात् इस प्रकार बोलते हुए ही वह महामना मुसेखान पीछे की ओर से लौटने वाले विशाल सेना एवं अपनी सेना से युक्त अशरफशहा, दोनों शेखों सहित मत्राजी राजा, उसी प्रकार फलटण का बलवान् राजा, फत्तेखान की सेना और अनेक सामंत राजाओं के साथ वेगपूर्वक पुरंदर किले की चढ़ाई चढ़ने लगा।
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