मैव दद्ध्वं पदं पश्चात् पुरः पश्यत भूधरम् ।
न जहाति जयः प्रायः संपरायस्थितं नरम् ॥
पीछे पग मत बढ़ाओं, सामने के किले पर दृष्टि रखो। युद्ध में स्थित रहने वाले मनुष्य की विजय प्रायः त्याग नहीं करती है।
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