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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 2
ततो मुसेखानमुखैर्यवनैः सबलैर्वृतः । मत्तजित्प्रमुखैर्भूपैरनेकैश्वाभिरक्षितः ॥ मतङ्गजैरिवोन्मत्तेः सामन्तैश्च समंतंतः । युतस्सोऽभिययौ तूर्ण शिवराजजिगीषया ॥
तत्पश्चात् मुसेखान आदि बलवान् यवनों के द्वारा परिवेष्टित, मत्ताजी प्रमुख अनेक राजाओं द्वारा रक्षित एवं हाथी के समान मदमस्त सामन्त राजाओं द्वारा चारों ओर से घिरे हुए उस फत्तेखान ने शिवाजी को जीतने की इच्छा से तुरन्त प्रस्थान किया।
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