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शिवभारतम् • अध्याय 14 • श्लोक 18
गुलिकायन्त्रनिर्यातगुलिकाभिन्नावग्रहाः। जलयन्त्रजलाकारकीलालोत्कलिकाकुलाः ॥ सञ्जातसज्वरावेशभरास्तनुतरस्वराः । केचित्पिपासिता एव कृतान्तातिथितां ययुः ॥
जिनके शरीर बंदूक की गोलियों से विदीर्ण हो गये हैं एवं पानी के फब्बारे की तरह उड़ने वाले रक्त की धारा से वे व्याप्त हो गये हैं, जिनके अंगों की एक जैसी पीड़ा हो रही है एवं जिनका स्वर अतिशय पतला हो गया है, ऐसे अनेक प्यासे लोग पानी-पानी करते हुए यमराज के आतिथ्य को प्राप्त करने के लिए चले गये।
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