उस किले के तट पर पड़े हुए अनेक लोग बड़े-बड़े पत्थरों से भग्न हुए वे शिंदुर की तरह लाल रक्त की उल्टियां करने लगे, उनके साथियों द्वारा उठाकर ले जाए जाते हुए वे प्राणरक्षणार्थ फिर वापस लौटकर वेग से अपने शिविर की तरफ चले गये।
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