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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 99
अपहतारिपुवीरानेकयाश्वप्रवेकप्रचुरकनकमुक्ताहाररत्नोपहाराः । अवनमितशिरस्काः सैनिकाः काबुकाद्याः सरभसकृतकार्याः शाहसूनुं प्रणेमुः ॥ इत्यनुपुराणे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां संहितायां त्रयोदशोध्यायः ॥
शत्रुवीरों को मारकर अपने कार्य को शीघ्र ही पूर्ण करके उत्तम हाथी, घोडे, विपुल स्वर्ण, मोतियों की माला एवं रत्नों को अर्पित करके सिर झुकाकर काबुल आदि सैनिकों ने शिवाजी को प्रणाम किया।
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