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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 98
अध विद्विषतस्तस्य शयानस्य रणाङ्गणे । कुञ्जरास्तुरगांस्तुङ्गास्तत्तदाभरणानि च ॥ चित्राण्यपि च वखाणि तनुत्राण्यायुधानि च ॥ याप्ययानानि कोषांच सम्भारानपरानपि ॥ संप्रहृष्टास्समादाय सुभटाः काबुकादयः ॥ पुरन्दरप्रभुं द्रष्टुं पुरन्दरगिरि ययुः ॥
फिर उस शत्रु के रणभूमि पर गिरने के बाद, हाथी, उन्नत घोडे, अनेक प्रकार के आभूषण, रंगबिरंगे वख, कवच, शस्त्रास्त्र, पालकियां, कोष और दूसरे सामान को भी लेकर अत्यंत आनंदित होकर काबुक आदि उत्कृष्ट योद्धा शिवाजी से मिलने के लिए पुरंदर किले पर चले गये।
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