किसी के पैर टुटकर, किसी के हाथ टुटकर, किसी के कवच खण्डशः होकर, किसी की छाती भिन्न होकर, किसी की रीढ़ की हड्डी टुटकर, तो किसी की कोहनी फुटकर, वे करुणा जनक आवाज निकालकर पृथ्वी पर लुढक-लुढकर मूर्च्छित हो गये।
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