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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 95
तत्र दन्ताग्रविन्यस्ततृणास्त्राणार्थिनो जनाः ॥ शतशः स्वैरमगमन् विमुक्तास्तेन मानिना ।।
उस समय दांतों में तिनका दबाकर शरण में आये हुए सैकड़ों लोगों को उस स्वाभिमानी काबुक ने मुक्त कर दिया और वे स्वछन्दता से चले गए।
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