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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 94
युध्यमानेऽभिमानेन सिंहेनेवोन्मदे गजे। शिवसेनधिपतिना पातिते हैबतात्मजे ॥ रक्तमेदोवसामांसमसृणे क्षोणिमण्डले । कोपि धर्तुमहो धैर्यं प्रभुरासीन्न तइले ॥
सिंह जैसे मदमस्त हाथी को गिराता है, उसी प्रकार अभिमान से युद्ध करने वाले उस शिवाजी के सेनापति के द्वारा हैबत राज के पुत्र को गिरा देने पर रक्त मेद, चर्बी एवं मांस इन सबका भूमि पर कीचड़ हो गया। उसके बाद उसकी सेना में कोई भी धैर्य धारण करने वाला स्वामी नहीं था।
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