स यावत् प्रासमादाय त्रासयत्यभितः परान् ॥
तावत् कुन्ताभिघातेन काबुकस्तमपातयत्॥
वह जो भाला लेकर शत्रुओं को चारों ओर से पीडित कर रहा था, उसको ही काबुक ने अपने भाले के प्रहार से गिरा दिया।
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