हैवतस्यात्मजस्तत्र शत्रुभिर्विमुखीकृतम् ॥
न चक्षमे स्थिरीकर्तुं तदलं विचलइलम् ॥
शत्रुओं के द्वारा वापस लौटाएं गए एवं विचलित होकर पलायन करने वाली सेना को हैवत राजा का पुत्र नियन्त्रित नहीं कर सका।
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