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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 88
प्रहतानेकगत्यश्च द्विपवर्षसमुद्भवा । प्रावर्तत तदा तत्र स्याद्रक्ततरङ्गिणी ॥
तब वहाँ पर पदातियों, घोड़ों एवं हाथी के शरीर से निकलने वाली रक्त की नदी वेग से बहने लगी।
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