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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 85
शरासनधरैश्शूरैः शरच्छिन्नान्यनेकशः ॥ परितस्तरिरेऽरीणा शिरांसि समराजिरे ॥
शूर धनुर्धरों के बाणों के द्वारा तोड़े गये शत्रुओं के अनेक सिर युद्धभूमि पर फैल गए।
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