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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 82
भटान् सारेच्छदान् भित्वा वसुधा विविशुः शराः ॥ ततो रुधिरधाराणामाविरासुः परम्पराः ॥
कवचधारी योद्धाओं को छिन्न-भिन्न करके जब बाण पृथ्वी में घुस गए तब उनके शरीर से रक्त की धारा अविरल होकर बहने लगी।
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