तब वह उसके आगमन को सुनकर पुरन्दर किले पर रहने वाले, इन्द्र की तरह वह शिवाजी कवच पहनकर धनुष, बाण को हाथ में लेकर, सभी साधनों से सज्ज होकर, हंसमुख एवं विनम्नवदन वह शिवाजी बलराम की तरह अपने धैर्यवान् सैनिकों को यह बोला।
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