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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 78
समरारम्भसंरभादन्योन्यमभिधायिनाम् ॥ तार्थ्यस्फुरत्तरतरतुरगस्थितिशालिनाम् ॥ प्रत्यहन्यन्त शतशः शस्त्रैः शखाणि शत्रिणाम् ॥ विद्युतामिव तेजोभिर्दिवि तेजांसि विद्युताम् ।।
युद्ध के आवेश में एक दूसरे पर प्रहार करने वाले गरुड़ से भी अधिक वेगवान घोड़े पर बैठे हुए योद्धाओं के शस्त्र, आकाशीय विद्युत जिस तरह परस्पर टकराती है उसी प्रकार सैकड़ों शस्त्र टकराए।
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