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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 76
अथ भीकक्ष भीमक्ष तुको गोदः सदस्तथा ॥ सम्भश्चान्येच सुभटाः पुरोविहितकाबुकाः ॥ द्रुतमुत्पातितोदग्रतुरगास्तरलायुधाः ॥ प्रहरन्ति स्म बल्लालप्रभृतींस्तीव्रया क्रुथा ॥
तत्पश्चात काबुक के नेतृत्व में भी काजी, भीमाजी, तोकाजी, गोदाजी, सदोजी, संभाजी और दूसरे सैनिक भी अपने उन्नत घोड़ों को वेग से कूदाते हुए एवं अपने चपल शस्त्रो से बल्लाल आदि वीरों पर अतिशय क्रोध से प्रहार करने लगे।
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