मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 75
दर्शनीयतमः प्रांशुः पिनध्दकवचो युवा ॥ कुंतधारी धन्वधरो धीरः सैनिकसंवृतः ॥ तुङ्ग तुरङ्गमारूढः स तदाभ्यधिक तथा ॥ दिदीपे किल निर्वाणवेलायां दीपको यथा ॥
दर्शनीय उन्नत कवच धारण किया हुआ युवा, भाला एवं धनुष को धारण करने वाला, धैर्यवान सैनिकों से घिरा हुआ, ऊंचे घोड़े पर बैठा हुआ वह बल्लाल जैसे बुझता हुआ दीपक अत्यधिक प्रकाशित होता है वैसे वह सुशोभित होने लगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें