दर्शनीयतमः प्रांशुः पिनध्दकवचो युवा ॥ कुंतधारी धन्वधरो धीरः सैनिकसंवृतः ॥ तुङ्ग तुरङ्गमारूढः स तदाभ्यधिक तथा ॥ दिदीपे किल निर्वाणवेलायां दीपको यथा ॥
दर्शनीय उन्नत कवच धारण किया हुआ युवा, भाला एवं धनुष को धारण करने वाला, धैर्यवान सैनिकों से घिरा हुआ, ऊंचे घोड़े पर बैठा हुआ वह बल्लाल जैसे बुझता हुआ दीपक अत्यधिक प्रकाशित होता है वैसे वह सुशोभित होने लगा।
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