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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 67
रथाङ्गर्लाङ्गलैरक्षैर्मुसलैरप्युलूखलैः। उपलैश्च घरट्टैश्च प्रज्वलद्भिस्तथोल्मुकैः ॥ खादिराङ्‌ङ्गारपुञ्जश्च तप्तैस्तैलैख भूरिशः । तैस्तैश्शखैश्च वप्रस्थाः प्रतिवीरानवाकिरन् ॥
रथ के चक्के, हल, मुसल, ऊखल, पत्थर, घरह, जलता हुआ कोयला, खजूर के अंगारों का ढेर, तपा हुआ तेल एवं अनेक प्रकार के शस्त्र, परिखा में बैठे हुए लोग शत्रुवीरों पर फेंकने लगे।
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