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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 66
कृतहस्तविनिर्मुक्ताः सायकाः पातुकाः क्षितिम् । विविशुस्तत्तलं चोच्चैः ददृशुच फणीश्वरम् ॥
उत्कृष्ट धनुर्धरों द्वारा छोड़े गए एवं पृथ्वी पर गिरने वाले बाण उनके पेट में इतनी तेजी से घुसते थे कि तत्क्षण ही उनको शेषराज का दर्शन हो जाता था।
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