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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 64
शाखाभ्य इव वृक्षाणां चञ्चरीकपरम्पराः । शरासनेभ्यश्शूराणां निरीयुर्निशिताश्शराः ॥
वृक्षों की शाखाओं से जैसे भंवरों की संपूर्ण पंक्ति उड़ जाती है वैसे ही शूरवीरों के धनुष से तीक्ष्ण बाण निकलने लगे।
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