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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 6
अथ सेनापतिर्नाम फत्तेखानो महामनाः । मिनादरतनी शेखी फत्तेखानच कोपनः ॥ क्रूरो शरफशाहश्च धन्वधारी यशोधनः । सन्नाहसहिता पते यवनाः सज्जसाधनाः ॥ घाण्टिको मत्तराजश्च कुलिशोपमसायकः । तथा फलस्थानपतिर्बलवान् बाजनायकः ॥ सामन्ताः शतशश्चान्ये स्वर्णपृष्ठशरासनाः । स्वर्णसारसनाः स्वर्णवसनाः स्वर्णकेतनाः ॥ स्वर्णचन्द्र कमुद्रा‌ङ्ङ्किफलकद्युतिशालिनः । तस्थुराक्रम्य तरसा पुरं बिल्वसरोऽभिधम् ॥
तत्पश्चात् महामना फतेखान नाम का सेनापति, मिनादशेख एवं रतनशेख, क्रोधित फतेखान, क्रूर, धनुर्धारी एवं यशस्वी शरफशाह ये सभी कवचधारी एवं साधन सुविधाओं से सज्ज यवन तथा वज्र जैसे जिसके बाण हैं, ऐसा मदमस्त घाटगे, फलटण का राजा बाजनाईक एवं सेना के धनुष है पीठ पर जिसके ऐसे स्वर्णकटिबंदो से युक्त, स्वर्ण वस्त्रों से युक्त, स्वर्ण ध्वजाओं से युक्त, स्वर्ण एवं चादी से युक्त ढालों को धारण करने वाले अन्य सैकड़ों सामन्त राजाओं ने बेलसर नाम का शहर बलात अधीन करके वहीं स्थित हो गये।
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