यश प्राप्ति के लिए राम ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया, यशप्राप्ति के लिए राक्षसों का राजा बली पाताल चला गया, यशप्राप्ति के लिए ही शिवि राजा ने अपने मांस के टुकड़े करके दिये, यश के लिए ही शंकर ने हलाहल विष को पी लिया, यश के लिए ही दधीचि ने अपनी हड्डियां दी एवं सङ्गति को प्राप्त हो गये, यश के लिए ही परशुराम ने सम्पूर्ण पृथ्वी को छोड़ दिया था, यशप्राप्ति के लिए ही भीष्म शरशय्या पर सोये थे, इसलिए आज जब तक इनमें से प्रमुख- प्रमुख लोगों को चुनकर मारेंगे नहीं तब हम यश के लिए और धन के लिए शत्रुओं के साथ युद्ध करते रहेंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।