साभिमानैस्साभिमानं युध्यमानैश्शिरोबले ॥
इहास्माभिश्शिरोदेयं न तु देयं यशो रणे ॥
हम अभिमानी लोगों को अभिमान के साथ इस शिरबल स्थान पर लड़ते-लड़ते अपने शिर को देना चाहिए किन्तु शत्रु को युद्ध में यश नहीं देना चाहिए।
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