न द्वास्मन्निधनेनैव स्वामिकार्यं प्रसिध्यति ॥
अतो युध्दाय महते वप्रमेवाश्रयामहे ॥
केवल हमारी मृत्यु से ही स्वामिकार्य की सिद्धि नहीं होती है। इसलिए बड़े युद्ध के लिए इस परिखा का ही आश्रय लेंगे।
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