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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 48
यदि वो भयमेतर्हि तर्हि सद्यो ममाज्ञया ॥ द्वितीयमिवमामत्र वप्रमालम्ब्य तिष्ठत ॥
यदि तुम अब भी भयभीत हो तो मुझे दूसरा तट समझकर, मेरा शीघ्र ही आश्रय लेकर और मेरी आज्ञा से यहां निवास करो।
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