मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 44
अथ पद्धिः पदातीनां भिन्दन्त इव भूतलम् । कर्तयन्त इवाश्चीयवर्तकैव्योंममंडलम् ॥ प्रकिरन्त इवारीणामुपरि प्रलयानलम् ॥ शरास्ते ददृशुस्सद्यो विकुर्वाणाश्शिरोवलम् ॥
तत्पश्चात् पदातियों के पैरों से मानों भूतल को विदीर्ण करते हुए घोड़ों के खुरों से मानों आकाश को काटते हुए शत्रुओं पर मानो प्रलयाग्नि को बिखेरते हुए उन शूरवीरों ने शीघ्र ही शिरबल को देख लिया अर्थात् पहुंच गए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें